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126 वी जयंती पर याद किये गए पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल

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रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया

देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले के बरहज मे 126 वी जयंती पर याद किये गए पण्डित रामप्रसाद बिस्मिलपण्डित रामप्रसाद बिस्मिल का जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित रहा-पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास l
अनन्त पीठ आश्रम के पवित्र भूमि पर स्थित पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा व समाधि पर वैदिक मंत्रोच्चारण कर पुष्प अर्पित करते हुए 126वी जयंती मनाई गई। इस ऐतिहासिक अवसर को अनंत पीठ आश्रम में बड़े धूमधाम से मनाया गया।
अनंत पीठ आश्रम के पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास द्वारा सर्वप्रथम पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और शांति पाठ तथा वैदिक मंत्रोच्चार किया गया।ततपश्चात एक सभा का आयोजन किया गया जिसमे पीठाधीश्वर आञ्जनेय दास ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के जीवन व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल का जीवन राष्ट्र को समर्पित था तथा उन्होंने भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया। हम सभी को बिस्मिल की जीवन व सिद्धान्तों तथा राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा लेनी चाहिए। आज समाज में बहुत से ऐसे अराजक तत्व हैं जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं, उन्हें ऐसे महापुरुषों से सीख लेनी चाहिए।
पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल के अस्थि कलश को बरहज में लाकर अनन्त पीठ आश्रम के प्रांगण में स्थापित किया गया |
सभा को संबोधित करते हुए विनय मिश्रा ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की कुर्बानी पर अपना विचार रखते हुए कहा कि जिस समय भारत माता गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी वैसे में शाहजहांपुर से चलकर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने अपना संपूर्ण जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित कर दिया बाबा राघव दास के साथ पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल के अच्छे संबंध थे बाबा राघव दास बिस्मिल की फांसी के बाद अंतिम संस्कार करके उनकी राख व अस्थि कलश को बरहज में लाकर अनन्त पीठ आश्रम के प्रांगण में स्थापित किया ऐसे क्रांतिकारी को पाकर आज पूरा राष्ट्र धन्य है। युवा समाज को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल से प्रेरणा लेनी चाहिए देश और राष्ट्र के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने चाहिए।
सभा को संबोधित करते हुए अंश फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष अभय कुमार पाण्डेय ने कहा कि आज ऐसे ऊर्जावान नौजवानों की आवश्यकता है जो देश के मान सम्मान तथा स्वाभिमान की रक्षा कर सकें आज की सभा यही सीख देती है कि जो देश की वर्तमान स्थिति है ऐसी स्थिति में समाज अनेकानेक वर्गों में बटा हुआ है, जबकि स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई बिना किसी वर्ग के बटे सब आपस में मिलकर के एकजुट होकर लड़े थे तब हमें आजादी मिली थी । दुनिया में भारत ही मात्र एक ऐसी श्रव्य संस्कृति वाला देश है जिसका गौरव हमेशा से पथ प्रदर्शक का काम किया है। आगमेश शुक्ला ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम देशवासियों को इन महापुरुषों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

सभा में मुख्य रूप से ओम प्रकाश दुबे, सत्य प्रकाश पाण्डेय,अनमोल मिश्रा, अवधेश पाल, प्रिंस कुमार,कुनाल,प्रदीप, अभिनव, आर्या, मोनी, अनुपम आदि उपस्थित रहे।

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