December 3, 2022

Top1 india news

No. 1 News Portal of India

कुम्हारो का घर रोशन करने के लिए मिट्टी के बने दिया का करें प्रयोग-सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया

1 min read

रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया

     देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले के खुखुन्दू थाना क्षेत्र के तेनुआ निवासी पत्रकार मो0 सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया ने लोगो से अपिल की हैं की कुम्हारो का घर रोशन करने के लिए मिट्टी के बने दिए का प्रयोग करें l
आपको बता दें कि, देवरिया जिले से पत्रकारिता क्षेत्र मे काम करने वाले *टॉप 1 इंडिया न्यूज से ब्यूरो चीफ देवरिया पद पे कार्यरत मो0 सद्दाम हुसैन* ने कहा कि, रात दिन मेहनत कर दियाली बनाने वाले कुम्हारों के घर रोशन करने के लिए मिट्टी की दियाली का प्रयोग करें। जिससे कुम्हारों के घर खुशहाली व उमंग से भर जाए। उन्होंने कहा कि, अंधेरा कैसा भी हो, किसी भी रूप में हो, उससे निकलने का एक ही जरिया है, मिट्टी का दिया जलाएं।
दिवाली में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओ का उपयोग करें। मिट्टी के दियों से ही दिवाली मनाएं, क्योंकि इन बच्चों ने भी दिवाली मनानी है मिट्टी के ही दिये जलाना।

बना कर दिए मिट्टी के, जरा सी “आश” मैंने भी पाली है। मेरी मेहनत को खरीदो लोगों, मेरे घर भी “दिवाली” है।

दीपावली पर्व पर दूसरों के घरों में ज्ञान का दीपक और समृद्धी का प्रकाश फैलाने वाले कुम्हारों की विडम्बना है कि उनके घर अज्ञानता और विपन्नता का अंधेरा सदियों से कायम है।
दीपावली पर हर व्यक्ति अपने घर लक्ष्मी आगमन की कामना करता है। दीपावली वह मौका होता है जब दीपकों की रौशनी में लोग मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन कर उनसे सुख-समृद्धि की कामना करते हैं, लेकिन दिवाली पर जलने वाले दियों से लेकर लक्ष्मी गणेश की मूर्तियों को बनाने वाले कुम्हारों के यहां लक्ष्मी का आशीर्वाद नहीं मिलता, उनके घर विन्नता और अंधेरा ही कायम रहता है।
कुम्हारों का कहना है कि कुम्हार की चाक मिट्टी आज अपना ही वजूद तलाश रही है। कड़ी मेहनत से मिट्टी के दीपक, खिलौना और बर्तन बनाने वालो को खरीददार के लिए भी रोना पड़ रहा है। एक दौर था जब कुम्हार दीपावली का बेसब्री से इन्तजार करते थे। उस समय मिट्टी के दीपकों की बहुत मांग थी और बाजारों में खरीददारों की बड़ी भीड़ हुआ करती थी। पहले जिन गांवो में कुम्हारों की भरमार होती थी वहां भी अब बहुत कम कुम्हार रह गये हैं।
दीपाें के पर्व दीपावली और मिट्टी के दियों का चोली दामन का साथ है। कुम्हारों के दीपक से दमकती दीपावली पर चाइनीज सस्ती झालर नाग की तरह कुंडली मारकर बैठ गई है। दीपावली से दो-तीन महीने पहले जिन कुम्हारों को दम भरने की फुरसत नहींं मिलती थी, वहीं अब धीमी चाक पर कुम्हारों की जिंदगी रेंगती नजर आ रही है। उनका कहना है कि पहले व्यवसाय चाइनीज झालरों के कारण ठप्प हो गया था अब चाइनीज महामारी कोविड़-19 ने पूरी दुनिया को अपने चंगुल में दबोच रखा है। भले ही लॉकडाउन खुल गया है लेकिन बाजार में खरीददारों के अभाव के बाद उनका धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है।
बदलते चलन के साथ मिट्टी के दीए की कहानी ख़त्म होती जा रही है। पुश्तों से यही काम करने वाले कुम्हार आज दीवाली के पहले उदास और मायूस दिखते हैं l
जन जागरूकता करने वालों में प्रमुख रूप से मो0 सद्दाम हुसैन, नफीस अहमद, आशिफ खान आदि देशभक्त, स्वयंसेवक जन जागरूकता करते रहे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright ©2022-2023 Top1 India News | Newsphere by AF themes.
Translate »