December 3, 2022

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भू आकृतियों को आकार देने वाली प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है भू-आकृति विज्ञान

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रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया

         देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले मे भू आकृति विज्ञान भू आकृतियों और उनको आकार देने वाली प्रक्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। इसमें यह जानने की कोशिश करते हैं कि भू दृश्य जैसा दिखते हैं वैसा दिखने के पीछे कारण क्या है?
उक्त बातें बुधवार को बाबा राघव दास भगवान दास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित भू आकृति विज्ञान का विकास विषय पर व्याख्यान देते हुए भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ ओम प्रकाश शुक्ला ने कही। उन्होंने कहा कि 450 ईसवी पूर्व यूनानी समय में हेरोडोटस, अरस्तू, स्ट्रैबो, आदि से इसके अध्ययन की शुरुआत होती है। नदियां नए चट्टानों का अपरदन करके तलछट बनाने में सहयोग करती हैं। अपरदन की जो विभिन्न अवस्थाएं होती हैं वैसे ही स्थलमंडल की अपरदन अवस्थाओं का भू आकृति में वर्णन होता है।
मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.एस.एन तिवारी ने कहा कि भूगोल विषय क्षेत्र के अध्ययन का क्षेत्र है, जो विशेष अध्ययन के माध्यम से अपनी उपलब्ध प्रदर्शित करने का काम करता है। अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुनील श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे विशेष व्याख्यानओं से विद्यार्थियों को विशेष लाभ होता है तथा वरिष्ठ अनुभवी शिक्षकों के अनुभवजन्य ज्ञान मिलता है। आभार ज्ञापन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.शैलेंद्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रदीप शुक्ला ने मंगलाचरण करके किया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. विनय तिवारी ने विषय प्रवेश कराने के साथ ही सभी सहभागी लोगों के प्रति आभार जताते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. अरविंद पांडेय, पुनीत तिवारी, कृति तिवारी, सुधीर सिंह, प्रवीण सागर, स्नेहा दीक्षित, वर्षा उपाधयाय, रागिनी गुप्ता, मो. असलम, शालिनी राव, मधुलिका, किरन गुप्ता, दिव्या शुक्ला, मधु मिश्रा, अजय कुमार आदि मौजूद रहे।

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