November 27, 2022

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अपनी तस्वीर बदलने के आश में बैतालपुर चीनी मिल

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रिपोर्ट – सद्दाम हुसैन ब्यूरो चीफ देवरिया

     देवरिया: (उ0प्र0) देवरिया जिले के बैतालपुर चीनी मिल को 2007-08 में बंद कर दिया गया। इसे डायनामिक सुगर प्राइवेट लिमिटेड उन्नाव ने वर्ष 2011 में खरीदा, फिर गौरीबाजार चीनी मिल कभी कपड़ा मंत्रालय की चीनी मिल हुआ करती थी। यह 1996-97 में बंद हो गई। इसको चालू करने के लिए आंदोलन भी हुआ, लेकिन इसके बाद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इस चीनी मिल को 2011 में राजेंद्रा प्राईवेट इस्पात लिमिटेड कोलकाता, से बेच दिया गया। इसी तरह देवरिया चीनी मिल 2006-07 में बंद हो गई। इसे आइकान सुगर मिल प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली के हाथों 2011 में बेच दिया गया। वर्तमान में 1903 में स्थापित एशिया की सबसे पुरानी चीनी मिल प्रतापपुर ही चल रही है।
मायावती सरकार में जिले की चार चीनी मिलों को औने-पौने दामों पर बेच दिया गया था। जिसका कीमत लगभग अरबों की मिल्कियत वाली इन चीनी मिलों की बिक्री पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से प्रदेश की 21 चीनी मिलों की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी गई है साथ ही सीबीआइ से जांच कराने की याचिका पर राज्य सरकार, सीबीआई व सीएजी,     भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से खरीद-फरोख्त में घपलेबाजी का सच सामने आता रह गया और तारिख पर तारीख चलता चला आया आगे अब क्या उम्मीद किया जाए !
प्रदेश में देवरिया और कुशीनगर के अलग होने से पहले तक यहां 14 चीनी मिलें थीं। 1993 में कुशीनगर बना तो नौ मिलें उसके हिस्से में चली गई, जबकि पांच देवरिया में रह गईं। नब्बे के दशक के बाद सरकारों की बेरुखी से एक-एक कर चीनी मिलों के बंद होने का सिलसिला शुरू हुआ तो देवरिया की चार मिलों पर ताले लग गए। देवरिया और भटनी मिल के अस्तित्व के नाम पर सिर्फ खंडहर बचा है। गौरीबाजार चीनी मिल को कोलकाता की एक फर्म को बेच दिया गया। संचालन की शर्तों के साथ बिकी बैतालपुर चीनी मिल को चालू कराने के लिए लंबे समय से किसान आंदोलित हैं। कलेक्ट्रेट में 120 दिनों तक उनका आंदोलन चला, मगर चुनाव की डुगडुगी बजने के बाद उनकी आवाज भी दबा दी गई। पिछले लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव में चीनी मिल एक बड़ा मुद्दा रहा। सभी दलों ने इसे अपने एजेंडे में शामिल करते हुए बंद मिलों को चलाने की प्राथमिकता बताई गई थी। मगर चुनाव बीतने के बाद किसी ने इस मुद्दे पर कोई रुचि नहीं दिखाई।

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